मुख्यपृष्ठ मोर छत्तीसगढ़ भोरमदेव मंदिर कवर्धा । Bhoram Dev Temple Kavrdha Dist: छत्तिसगढ़ के सबसे प्राचीन मंदिर। भोरमदेव मंदिर कवर्धा । Bhoram Dev Temple Kavrdha Dist: छत्तिसगढ़ के सबसे प्राचीन मंदिर। Author - ADMIN जुलाई 25, 2022 0 (छत्तीसगढ़ का खजुराहो भोरमदेव मंदिर कवर्धा )भोरमदेव मंदिर ( Bhoramdev Mandir C.G )भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ राज्य के कबीरधाम जिला मुख्यालय के कवर्धा ब्लॉक से लगभग 18 किमी की दूरी पर चौरागाव मे स्थित है।यह मंदिर छत्तीसगढ़ के प्राचीन मंदिर मे से एक माना जाता है। तथा भोरमदेव परिसर को “छत्तीसगढ़ के खजुराहो” के नाम पर से भी जाना जाता है । भोरमदेव मंदिर का इतिहास- भोरमदेव मंदिर प्राचीन मंदिरो मे से इस मंदिर की निर्माण पर पुरातात्विक विभाग द्वारा की गयी खोज और यहाँ मिले शिलालेखो के अनुसार भोरमदेव मंदिर का इतिहास 10 वीं से 12 वीं शताब्दी के बीच कलचुरी काल का माना जाता है। भोरमदेव मंदिर के निर्माण का श्रेय फैनिनगवंश वंश के लक्ष्मण देव राय और गोपाल देव को दिया गया है। मंदिर परिसर को अक्सर “पत्थर में बिखरी कविता” के रूप में जाना जाता है। इस क्षेत्र के गोंड आदिवासी भगवान शिव की पूजा करते थे, जिन्हें वे भोरमदेव कहते थे इसीलिए इस मंदिर को भोरमदेव मंदिर के नाम से जाना जाने लगा। इतिहासकारों की माने तो यह मंदिर पूरे खजुराहो समूह से भी पुराना है।भोरमदेव मंदिर की आद्भूत वास्तुकला का रहस्य -भोरमदेव मंदिर अगर हम वस्तुकला के बारे में बात की जाए तो हमे क मंदिर की सरंचना उड़ीसा के कोणार्क मंदिर और खुजराहो से मिलती जुलती है। और इस मंदिर में भी कोणार्क मंदिर और खुजराहो के समान स्थापत्य शैली में कामुक मूर्तियों के साथ कुछ वास्तुशिल्प विशेषताओं को जोड़ा गया है।गर्भगृह मंदिर का प्राथमिक परिक्षेत्र है जहाँ शिव लिंग के रूप में पीठासीन देवता शिव की पूजा की जाती है।मंदिर पूर्व की ओर एक प्रवेश द्वार के साथ बनाया गया है जो एक ही दिशा का सामना करता है। इसके अतिरिक्त, दक्षिण और उत्तर दिशाओं के लिए दो और दरवाजे खुलते हैं। हालांकि, पश्चिमी दिशा की ओर कोई दरवाजा नहीं है। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार में गंगा और यमुना की प्रतिमाएँ दिखती हैं। मंदिर में भगवान शिव और भगवान गणेश के साथ साथ भगवान विष्णु के दस अवतारों की छवियों को भी दीवारों में चित्रित देखा जा सकता है।भोरमदेव मंदिर के आस-पास और भी विभिन्न सारे प्राचीन मंदिरे -हनुमान मंदिरभोरमदेव मंदिर परिसर में हालही में हनुमान जी के लिए एक मंदिर का निर्माण भी करबाया गया है। यह मंदिर प्रांगण के एक तरफ स्थित है।मड़वा महलमड़वा महल मुख्य मंदिर परिसर के 1 किमी के आसपास में स्थित है। इसका निर्माण नागवंशी राजा, रामचंद्र देव और राज कुमारी अंबिका देवी की शादी के उपलक्ष्य में किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि इस मंदिर की संरचना मैरिज हॉल या पंडाल के समान है, इसलिए इसे इसका नाम मड़वा मिला। इस मंदिर के प्रवेश द्वार पर पारंपरिक वास्तुशिल्प अलंकरण हैं।इस्तलीक मंदिर2 या 3 वीं शताब्दी में सूखे या जले हुए मिट्टी की ईंटों से इस्तलीक मंदिर भोरमदेव मंदिर के पास स्थित एक और प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर की संरचना को मुख्य भोरमदेव मंदिर से सटे हुए पाया जा सकता है। यह वर्तमान में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है, जिसमें केवल मण्डप है और जिसमें मण्डप और प्रवेश द्वार नहीं है। उमा महेश्वर की छवियों के साथ यहां एक मूर्ति शिवलिंग की पूजा की जाती हैwww.morchhattisgarh.in Tags पौराणिक कथाप्राचीन मंदिरमंदिरमोर छत्तीसगढ़ Facebook Twitter Whatsapp और नया पुराने